Qurbani Ki Dua | सही इस्लामिक तरीका पूरी जानकारी – 2023

Qurbani Ki Dua

अस्सलामुअलैकुम दोस्तो, आज के इस पोस्ट में मैंने आपको Qurbani Ki Dua और क़ुरबानी करने का तरीका और क़ुरबानी के मसाइल और क़ुरबानी से जुड़ी बहुत सारी अहम् बातो को बताया है| जिसको आपको जानना चिहिए तो इस आर्टिकल को आपको को लास्ट तक पढ़ना है इस आर्टिकल को पढ़ कर आपको क़ुरबानी के बारे में बहुत सारी नॉलेज हो जाये गी|

 Qurbani Ki Dua

Qurbani Ki Dua

मेरे अज़ीज़ दोस्तो, मैंने आपको इस आर्टिकल में Qurbani Ki Dua को हिंदी अरबिक और इंग्लिश भाषा में बताया हूँ आपको जिस भाषा में Qurbani Ki Dua पढ़ना हो आप पढ़ सकते है|

Qurbani Ki Dua in Hindi

इन्नी वज्जहतु वजहि य लिल्लज़ी फ़ त रस्मावाति वल अर्दा हनीफँव वमा अना मिनल मुशरिकीन इन्ना सलाती व नुसुकी मह्या य व ममाती लिल्लाहि रब्बिल आलमीन * ला शरी क लहू व बि ज़ालि क उमिरतु व अ न मिनल मुस्लिमीन * अल्लाहुम्मा मिन बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर *

कह कर ज़िबह करे , फिर यह दुआ पढ़े

* अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन्नी कमा तकब्बलता मिन ख़लीलिक इबराहीमा अलैहिस्सलामु व हबीबिक मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम *

Qurbani Ki Dua In Hindi

नोट- अगर आपने क़ुर्बानी (Qurbani) अपनी तरफ से किया हो तो मिन्नी औरअगर दूसरे की तरफ से ज़ब्ह किया हो ! तो मिन्नी कीं जगह मिन कह फला का नाम कहें ! यानी उसका नाम ले !

मतलब अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन ( यहाँ जिसकी तरफ से क़ुरबानी हो उसका नाम ले जैसे- मिन कामरान  , मिन आबिद, मिन वसीम वगैरह ) कमा तकब्बलता मिन ख़लीलिक इबराहीमा अलैहिस्सलामु व हबीबिक मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम !

और अगर जानवर मुश्तरक ( शिरकत की कुर्बानी ) हो ! मतलब आप और कुछ लोग मिलकर क़ुर्बानी कर रहे हो तो –  भैंस, ऊंट वगेरह, तो फला ( मिन ) की जगह सब शरीको के नाम ले !

Qurbani ki Dua in Arabic

إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّماَوَاتِ وَالأَرْضَ حَنِيفَاً وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ . إِنَّ صَلاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ العَالَمِينَ لاَ شَرِيكَ لَهُ وَبِذَلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا أَوَّلُ المُسْلِمِينَ ، اللَّهُمَّ مِنْكَ وَلَكَ

بسم الله الله اكبر” کہہ کر ذبح کرے , پھر یہ دوآ پڑھے

اللهم تكبال مني (من فلان) كام تكبلت من خليق إبراهيم عليهيس سلام وحبيبك محمدين صلى الله عليه وسلم.

Qurbani Ki Dua In Urdu

Qurbani ki Dua with Urdu Translation

ترجمہ: میں نے اپنا منہ اس ذات کی طرف کیا جس نے آسمانوں اور زمین کو پیدا کیا۔ میں ابراہیم کی ملت پر ہوں جو حقیف اور مسلم تھے۔ میں

مشرکوں میں سے نہیں ہوں۔ بے شک میری نماز، میری قربانی ، میری زندگی اور میری موت سب اللہ رب العالمین کیلئے ہے ۔ اس کا کوئی شریک

نہیں، مجھے اس بات کا حکم دیا گیا ہے اور میں سب سے پہلے فرماں بردار ہوں ۔ اے اللہ یہ ( جانور ) آپ کی طرف سے ملا ہے اور

(آپ کے لئے ہی ( یہاں اپنا نام لیا جاۓ

یہا کی طرف سے قربان کیا جار ہا ہے اللہ کے نام کے ساتھ اور اللہ سب سے بڑا ہے۔ ( ابواؤ ، ابن ماجہ )

مندرجہ ذیل بالا دعا پڑھ کرذ بح کر دے ۔ ذرائع میں تین یا چار رگیں کٹنی چاہئیں ۔

Qrbani ki Dau in English

Qrbani ki Dau in English

INNI WAJJAHTU WAJHIA LILLAZI FATARAS SAMAWAATI WL ARZ HANEEFA W MA ANA MINAL MUSHRIKEEN, INNA SALATI W NUSUKI W MAHYAYA WMAMATI LILLAHI RABBIL AALMEEN, LA SHARIKA LAHU, W BIZALIKA UMIRTU, W ANA AWWALUL MUSLIMEEN, ALLAHUMMA LKA WA MIN KA BIS MILLAH ALLAH HU AKBAR.

Qrbani karne ki Baad Ki Dau in English

Allahumm takbbal minni (‘Min Phala’) kama takbbalt min khaliliqa Ibrahim Alaihis Salam wa HabibikaMuhammadin sallallahu alayhi wa sallam

Qurbani Ki Niyat

अगर किसी इंसान ने क़ुरबानी की नियत से 8 बकरे खरीदे और इनको पाला और वह इंसान मालदार भी है तो वो इंसान इन बकरो को बेच कर अपनी कोई भी ज़रूरतों को पूरा कर सकता है?

आपने बकरा खरीदते वक़्त आप की नियत क़ुरबानी की थी तो फिर वह बकरे क़ुरबानी के लिए खास हो गए|अब उन बकरो से कोई बिसिनेस्स या उनसे कोई फायदा नहीं उठाया जा सकता|अगर उनको बेचा तो प्रॉफिट क़ुरबानी में ही लगाना पड़ेगा या प्रॉफिट सदका करना पड़ेगा|

अगर आपने खरीदा ऐसे ही शोक में था नियत यह थी की देख लेंगे हो सकता है इनमे से किसी को क़ुर्बान कर देंगे या बाद में नियत बन गयी की सब को कुर्बान करूंगा तो ऐसे इरादे से कुछ नहीं होता आप इन बकरो से बिसिनेस्स कर सकते है खा भी सकते है और बेच भी सकते है और क़ुरबानी भी कर सकते है|

अगर खरीदते वक़्त नियत क़ुरबानी की थी और वह आदमी मालदार भी है तो ऐसे में वो बकरे बेचे नहीं जा सकते उनका प्रॉफिट हलाल नहीं होता उन पैसो का आपको जानवर लेना पड़ता है और अगर नहीं लिया तो सदका करने पड़ते है|

Qurbani Ka Tarika

जानवर ज़िबह करने का सही तरीका ये है के आप जानवर को ऐसे लेताये की जानवर की टाँगे क़िब्ले की तरफ हो और उसका सर सीधा कर दें और आप भी क़िब्ले की तरफ हो जाये और आप के हाथ में छुरी हो और छुरी का रुख भी क़िब्ले की तरफ होना चाहिए|

जानवर को लेटाने के बाद जब उसके टांगो में रस्सिया बांध दी जाती है तो उसको क़िब्ले की तरफ घुमाना आसान हो जाता है उसके बाद मिस्मिल्लाही अल्लाह हुअक्बर पढ़ कर छुरी चलाये|अगर आप कसाई से ज़बह करवा रहे है तो कसाई को बोले के वो ऊँची आवाज़ में मिस्मिल्लाही अल्लाह हुअक्बर पढ़ कर छुरी चलाये|

और अगर आपने और कसाई ने मिलकर छुरी चलनी है तो फिर दोनों पर लाज़िम है के मिस्मिल्लाही अल्लाह हुअक्बर पढ़े|और फिर चार रागे काट कर चोर दे मगज में छूरा मारना हराम है ये नहीं करने दे कसाई को इससे जानवर को तकलीफ होती है और ब्लड भी सही से नहीं निकल पता और गोश्त की लज़्ज़त भी ख़तम होती है|

और जो ब्लड में बीमारियां होती है वो भी नहीं निकल पति है| इससे दुनिया का भी नुकसान है और आख़िरत का भी नुकसान है उसको नहीं करने दे ये हरकत अगर कर लेगा तो इससे जानवर हाराम नहीं होगा लेकिन ये मकरूह नापसंदीदा अमल है|जानवर के चार रागे काट कर चोर दे उसको तड़पने दे ब्लड सारा निकल जायेगा अल्लाह आप की क़ुरबानी क़ुबूल करेगा उसके बाद जब वह ठंडा हो जाये तो खाल उतारे और फिर खाये|

Qurbani Kya Hai?

सहाबा ने पूछा या रसूलल्लाह ये Qurbani Kya Hai आपने फ़रमाया तुम्हारे बाप इबराहीम अलैहिस सलाम की सुन्नत है|और इसमें हर बाल के बदले में अल्लाह तुम्हे नेकी अता फरमाते है और जब पहला कतरा खून का ज़मीन पर गिरता है तो अल्लाह क़ुरबानी करने वाले के गुनाहो को माफ़ फरमा देते है|

वैसे तो जब से अल्लाह तआला ने हज़रते इंसान को पैदा किया उसी दिन से क़ुरबानी का सिलसिला है|और ये जो क़ुरबानी है गोयह के ये बन्दों का इम्तेहान है अल्लाह की तरफ से बन्दों का इम्तेहान है के बंदा जान, माल और औलाद में इनसे ज़्यादा प्यार करता है या मुझसे ज़्यादा प्यार करता है|ये अल्ल्हा की तरफ से आज़माइश है|

Qurbani Kyu Kiya Jata Hai?

क़ुरबानी इसलिए किया जाता है क्योंकि अल्लाह ने हमें क़ुरबानी करने का हुक्म दिया है जब अल्लाह ने इबराहीम अलैहिस सलाम को हुक्म दिया के अपने बेटे को ज़बह कर दो और इबराहीम अलैहिस सलाम ने अपने बेटे को ज़बह करने के लिए लेटाया तो इसके बदले में अल्लाह ने कोई जानवर दिया के इसको ज़बह करो|

इबराहीम अलैहिस सलाम का ये अमल अल्लाह को पसंद आया| तो हमें इससे ये पता चलता है की क़ुरबानी करना अल्लाह का हुक्म है इसलिए क़ुरबानी किया जाता है|

Qurbani Ki Fazilat

रसूलल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फ़रमाया बकराईद के दिनों में अय्यामे नहर में अल्लाह को जानवर का खून बहाने से ज़्यादा कोई अमल महबूब नहीं है|और हर बाल के बदले में अल्ल्हा नेकी अता फरमाते है ये क़ुरबानी की बहुत बड़ी फ़ज़ीलत है|

Qurbani Ke Masail

Qurbani Wajib Kispar Hai?

सारे बावन तोला चांदी इतनी मलियत का जिसके पास सोना हो, या चांदी हो, या तिजारती माल हो (वो सामान जो आपने बेचने के लिए ख़रीदा है ) या कैश रकम हो, या जरूवात ज़ाय सामान (वो सामान जो पुरे साल इस्तेमाल नहीं होता हो )

ऐसी कोई भी चीज़ आपके पास हो जो इतनी मालियत की आपके के पास हो या एक नहीं दो या चार सामान मिल कर इतनी मालियत तक पहुंच जाती हो दूसरे लफ्ज़ो में कहे तो आपके पास जो इस्तेमाल में आने वाली चीज़ो के अलावा आपके पास इतनी मालियत की माल मौजूद है और ज़रूरी खर्चे उसमे से निकाल दे कर्ज़े निकाल दे ये सब निकालने के बाद अगर आपके पास पचास से साठ हज़ार बचते है तो फिर आपके ऊपर क़ुरबानी करना वाजिब है|

Kya Karza Lekar Qurbani Kar Sakte Hai?

अगर आप कर्ज़ा लेकर क़ुरबानी करोगे और अगर खतरा है के आप कर्ज़ा अदा नहीं कर सकता तो फिर आपके लिए क़ुरबानी करना जायज़ नहीं है क्यों के दूसरो का हक़ दबा के आप के इबादत की वजावरी ठीक नहीं है|

Kya Bakra-Eid Ki Namaz Se Pahle Qurbani Karna Jaiz Hai?

नबी सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया है की ईद की नमाज़ के बाद जिसने क़ुरबानी की तो उसकी क़ुरबानी होगी नमाज़ से पहले क़ुरबानी की तो आपने उस क़ुरबानी को क़ुबूल नहीं किया|

तो इससे पता चलता है के शहर में जहां ईद की नमाज़ होती है वहा ईद की नमाज़ से पहले क़ुरबानी नहीं होती है|

तो चुकेह अब तो बहुत सरे ईद की नमाज़ हो रही है तो उलमाह कहते है की जिस शहर में आप रहते है पुरे शहर में कही भी ईद की नमाज़ हो जाएगी तो आपके लिए क़ुरबानी करना जाएज़ होगा| बेहतर तो यह है की आप खुद जब तक ईद की नमाज़ नहीं पढ़ लेते तब तक क़ुरबानी ना करे लेकिन अगर किसी ने क़ुरबानी कर ली खुद नमाज़ पढ़ने से पहले तो अगर पुरे शहर में कही ईद की नमाज़ हो चुकी थी तो आप की क़ुरबानी हो गयी ईद की नमाज़ नहीं हुई थी आपकी क़ुरबानी नहीं हुई|

Janwar Khareedte Waqt Kya Dekhe?

सबसे पहली बात चार जानवर(ऊंट, गाय, बकरा, दुम्बा) की क़ुरबानी जायज़ है|हिरण की क़ुरबानी नील गाय की क़ुरबानी और दूसरे जो जंगली जानवर है उनकी क़ुरबानी जायज़ नहीं है|

इन चार जानवरो में ऊंट की उम्र( यहाँ साल की मुराद इस्लामिक साल से है) पांच साल होनी चाहिए गाय की उम्र दो साल होनी चाहिए और बकरे की उम्र एक साल होनी चाहिए दुम्बे की उम्र छः महीना हो देखने में मोटा ताज़ा हो तो उसकी क़ुरबानी जायज़ है|

Note – दांत का एतेबार नहीं है असल हुक्म है जानवर की उम्र का|

Janwar Me Koun Se ऐब Nahi Hone Chahiye?

दुम – जानवर की जो दुम है अगर आधी कटी हुई है तो उसकी क़ुरबानी जायज़ नहीं है अगर आधी से काम कटी है तो उसकी क़ुरबानी जायज़ है|अगर पूरी दुम चिपकाई हुई है या सी हुई है तो भी क़ुरबानी जायज़ नहीं है|

कान – कान अगर आधा कटा हुआ तो क़ुरबानी जायज़ नहीं है अगर आधा से कम कटा हुआ है तो क़ुरबानी जायज़ है |बाज़दफ़ा कान चीरे हुए होते है तो उससे कोई फर्क नहीं पड़ता क़ुरबानी जाएज़ है|

आँख – आँख का हुकुम यह के अगर एक आँख की बिनाई कम है तो क़ुरबानी जायज़ है बिनाई है लेकिन जानवर को कम नज़र आता है जानवर देख लेता है घास को तो भी ठीक है पूरी नज़र का ठीक होना ज़रूरी नहीं है अगर एक आँख की बिनाई बिलकुल ही गायब हो तो फिर उसकी क़ुरबानी दुरूस्त नहीं है|

लंगड़ापन – लंगड़ापन इतना हो अगर जानवर में के वह बेचारा लंगड़ेपन की वजह से आप उसको ज़बह करने जहां ले जाना चाहते है वो वहां तक भी नहीं जा पा रहा है पहिये लगाकर धक्का देना पर रहा है आपको तो फिर तो क़ुरबानी जायज़ नहीं है | अगर थोड़ा बहुत लंगड़ाता हो लेकिन चल लेता हो तो ऐसे जानवरो की क़ुरबानी जायज़ है|

सींग – अगर जानवर का सींग कटा हुआ टुटा हुआ है तो जायज़ है आप क़ुरबानी कर सकते है| अगर जानवर का सींग चोट लगने की वजह से इस तरह टूटा है की उसका सींग जड़ से उखरके उसके दिमाग हिल गया है तो फिर ऐसे जानवर की क़ुरबानी जायज़ नहीं है|

Qurbani Ke Janwaro Ki Umar Aur Unke Ausaaf

ऊंट पांच साल, गाय, भैंस, बैल दो साल, दुम्बा, भेड़, बकरी, खस्सी एक साल अगर दुम्बा या भेड़ का बच्चा छः महीने का हुआ और देखने में साल भर का मालूम होता हो तो क़ुरबानी करने जायज़ है|


क़ुरबानी के जानवर तमाम ऐबों से पाक होने चाहिए अगर थोड़ा सा ऐब है तो क़ुरबानी हो जाएगी मगर मकरूह होगी|और अगर ज़्यादा ऐब है तो क़ुरबानी नहीं होगी|

जो जानवर बिना सींग के पैदा हुआ है तो उसकी Qurbani जायज़ है| और अगर सींग थी मगर टूट गयी और गुदा तक टूट गया है तो क़ुरबानी न जायज़ है |

Qurbani ka Waqia

Eid-Ul Adha Ki Namaz Ka Tarika

नियत दिल के इरादे को कहते है ज़बान से कहना मुस्तहिब है|


नियत का तरीका – नियत की मैंने दो रिकात नमाज़ ईद उल अज़हा वाज़िब छः ज़्यादा तक्बीरो के साथ वास्ते अल्लाह के पीछे इस इमाम के मुंह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ |

नमाज़ का तरीका – पहली तक्बीर में अल्लाह हुअक्बर कह कर हाथ बांध ले और सना पढ़े उसके बाद दूसरी और तीसरी तक्बीर में अल्लाह हुअक्बर कह कर हाथ उठा कर खुला छोड़ दे और चौथी तकबीर में अल्लाह हुअक्बर कह कर हाथ बांध ले (पहली और चौथी तक्बीर में हाथ बांधना है ) | इमाम क़ेराअत करेंगे मुक्तदी सुने और पहली रिकात मुकम्मल करे |


दूसरी रिकात में क़ेराअत के बाद तीन तक्बीरे में हाथ उठा कर छोर दे चौथी तकबीर कहते हुए रुकू में जाये और नमाज़ मुकम्मल पूरी करे |


नमाज़ मुकम्मल (ख़तम) करने के बाद इमाम का खुत्बा ख़ामोशी से सुने | खुत्बा के बाद मुसाफा करे और गले मिले |

Qurbani Ki Dua Pdf

Bakra Zibah karne ki Dua In English

INNI WAJJAHTU WAJHIA LILLAZI FATARAS SAMAWAATI WL ARZ HANEEFA W MA ANA MINAL MUSHRIKEEN, INNA SALATI W NUSUKI W MAHYAYA WMAMATI LILLAHI RABBIL AALMEEN, LA SHARIKA LAHU, W BIZALIKA UMIRTU, W ANA AWWALUL MUSLIMEEN, ALLAHUMMA LKA WA MIN KA BIS MILLAH ALLAH HU AKBAR.

Kah Kar Zibah Kare, Fhir Ye Dua Padhe

Allahumm takbbal minni (‘Min Phala’) kama takbbalt min khaliliqa Ibrahim Alaihis Salam wa HabibikaMuhammadin sallallahu alayhi wa sallam

Qurbani Karne Ki Dua

इन्नी वज्जहतु वजहि य लिल्लज़ी फ़ त रस्मावाति वल अर्दा हनीफँव वमा अना मिनल मुशरिकीन इन्ना सलाती व नुसुकी मह्या य व ममाती लिल्लाहि रब्बिल आलमीन * ला शरी क लहू व बि ज़ालि क उमिरतु व अ न मिनल मुस्लिमीन * अल्लाहुम्मा मिन बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर *

कह कर ज़िबह करे , फिर यह दुआ पढ़े

* अल्लाहुम्मा तकब्बल मिन्नी कमा तकब्बलता मिन ख़लीलिक इबराहीमा अलैहिस्सलामु व हबीबिक मुहम्मदिन सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम *

Janwar zibah karne Ki Dua

إِنِّي وَجَّهْتُ وَجْهِيَ لِلَّذِي فَطَرَ السَّماَوَاتِ وَالأَرْضَ حَنِيفَاً وَمَا أَنَا مِنَ الْمُشْرِكِينَ . إِنَّ صَلاتِي وَنُسُكِي وَمَحْيَايَ وَمَمَاتِي لِلَّهِ رَبِّ العَالَمِينَ لاَ شَرِيكَ لَهُ وَبِذَلِكَ أُمِرْتُ وَأَنَا أَوَّلُ المُسْلِمِينَ ، اللَّهُمَّ مِنْكَ وَلَكَ

بسم الله الله اكبر” کہہ کر ذبح کرے , پھر یہ دوآ پڑھے

اللهم تكبال مني (من فلان) كام تكبلت من خليق إبراهيم عليهيس سلام وحبيبك محمدين صلى الله عليه وسلم.

FAQs

कुर्बानी को इंग्लिश में क्या कहते हैं?

कुर्बानी को इंग्लिश में  SACRIFICE कहते है|

कुर्बानी किसपर वाजिब हैं ?

जो भी साहिबे निसाब है उसपर Qurbani वाजिब है|साहिबे निसाब में आप एक चीज़ का ख्याल कर ले के जो घर का सरबरा है उसके पास जो सारे बावन तोला चांदी के बराबर जो निसाब है तो उसमे से वो कर्ज़ों को माइनस कर दे और जो घर में ज़रूरी राशन आना है और राशन इतना आएगा की आपके पास बकरा खरीदने के पैसे नहीं बचेंगे तो फिर क़ुरबानी वाजिब नहीं है|और अगर इतना पैसे बचते है की आप बकरा खरीद सकते है तो फिर आप पर क़ुर्बानी वाजिब है|

क्या हम कुर्बानी के बदले पैसे दे सकते हैं?

अल्लाह ने हमें Qurbani में जानवर ज़बह करने का हुक्म दिया है तो हमें जानवर ही ज़बह करना पड़ेगा हम पैसा नहीं दे सकते है|

क्या हम रात में कुर्बानी कर सकते हैं?

आप रात में कुर्बानी कर सकते है आपकी Qurbani हो जाएगी लेकिन बेहतर यह की क़ुर्बानी सुबह में किया जाये|

conclusion

तो दोस्तों हमने आपको इस आर्टिकल में Qurbani Ki Dua और Qurbani के बारे में ज़्यादा से ज़्यादा जानकारी देने की कोशिश की है अगर इस आर्टिकल में मुझसे कोई गलती हो गयी हो तो मुझे आप नीचे कमेंट बॉक्स में कमेंट करके बता सकते है और अगर आप

को ये आर्टिकल पसंद आया हो तो आप इस आर्टिकल को अपने दोस्तों के साथ और सोशल मीडिया पर शेयर कर सकते है|इस आर्टिकल पढ़ने के लिए आपका शुक्रिया|

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